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पिछले 18 महीनों से भारत में अमेरिका का कोई राजदूत न होना दर्शाता है बाइडेन का दोहरा चरित्र

दुनिया में अगर कोई सबसे बड़ा दोगला है, तो वे अमेरिका ही है। वक्त-वक्त पर अमेरिका अपना दोहरा रवैया दिखा ही देता हैं। एक तरफ तो अमेरिका, भारत को एशिया में अपना सबसे बड़ा भागीदार बताता और भारत के साथ अपने संबंध मजबूत करने की बात करता है। वहीं दूसरी तरफ यही अमेरिका कई ऐसे कदम उठा देता हैं, जो उसके भारत की तरफ रवैये पर सवाल खड़े कर दते हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को राष्ट्रपति बने डेढ़ साल हो गए। बावजूद इसके बाइडेन प्रशासन ने इन 18 महीनों में अब तक भारत में अपना राजदूत नहीं भेजा। जब से बाइडेन ने कार्यभारत संभाला, तब से ही भारत में अमेरिकी राजदूत का पद खाली पड़ा है। अमेरिका स्थित थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS)द्वारा संकलित किए गए आंकड़ें बताते हैं कि यह अब तक का सबसे बड़ा अंतराल हैं, जब भारत को अमेरिका ने कोई राजदूत नहीं भेजा।

यूएस-इंडिया पॉलिसी स्टडीज

CSIS में यूएस-इंडिया पॉलिसी स्टडीज में वाधवानी चेयर रिचर्ड रोसो ने एक ग्राफ तैयार किया, जिसके अनुसार आम तौर पर भारत में अमेरिकी राजदूतों ने अपने पूर्ववर्तियों के प्रस्थान के 6 से 7 महीनों के भीतर ही पदभार ग्रहण कर लिया। परंतु इस बार डेढ़ सालों में अब तक अमेरिका अपना राजदूत भारत नहीं भेज पाया। इसको लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी राजदूत की अनुपस्थिति ने भारत और अमेरिका के बीच राजनयिक संबंधों को गंभीर रूप से प्रभावित नहीं किया। हालांकि यह भी कहा गया कि यह सर्वश्रेष्ठ रूप नहीं है। नौकरशाही और राजनयिक प्रक्रियाओं को सुचारू तरीके से चलाने के लिए राजदूत का होना अत्यंत आवश्यक होता है।

द प्रिंट से बात करते हुए रोसो ने एक ईमेल के जरिए बताया कि राजदूत की अनुपस्थिती में हमें भारत के संग बातचीत करने में समस्या हो सकती है। नए पॉलिसी बनाने में या दोनों देशों के बीच किसी अनुबंध पर पहुंचने की शुरूआत भी राजनयिक स्तर से ही होते है। जानकारी के लिए बता दें कि पिछले अमेरिकी राजदूत केनेथ जस्टर का कार्यकाल जनवरी 2021 में खत्म हुआ था। इसके बाद से अब तक राजदूतों को अंतरिम दूत के तौर पर चार्ज दिया गया। परंतु अब तक अमेरिका भारत में अपने स्थाई राजदूत को नहीं भेज पाया है। हालांकि कुछ महीनों पहले रिपोर्ट्स जरूर सामने आई थीं, जिसमें लॉस एंजिल्स की मेयर एरिक गार्सेटी को भारत में राजदूत बनाकर भेजने की बात सामने आ रही थी। परंतु तब भी बात आगे नहीं बढ़ सकी।

अमेरिका का दोगलापन

एक तरफ तो वो डेढ़ सालों में भारत अपना राजदूत नहीं भेज सका। दूसरी ओर इमरान खान के पाकिस्तान में प्रधानमंत्री पद से हटते ही अमेरिका ने तुरंत डेविड लूम को अपना राजदूत बनाकर पाकिस्तान भेज दिया। बता दें कि जब तक इमरान खान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री थे, तब तक वहां अमेरिका का राजदूत नहीं था। अमेरिका के इस कदम के राष्ट्रपति जो बाइडेन की अदूरदर्शी सोच नजर आती हैं। भारत आज दुनियाभर में स्वयं को मजबूत करते जा रहा है। भारत पूरी दुनिया में एक खास अहमियत रखता हैं। देखने मिला था कि रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भी अमेरिका और रूस दोनों के लिए ही भारत का साथ कितना महत्वपूर्ण था। दोनों देश भारत को अपने भारत को अपने पाले में लाने के प्रयास करते रहे। परंतु भारत किसी के भी दबाव के आगे झुका नहीं और अपने रूख पर कायम रहा, जिसके माध्यम से भारत ने पूरी दुनिया को एक बड़ा संदेश दिया।

इसके अलावा अमेरिका हो या चीन या फिर कोई और देश, भारत अब हर किसी की आंख में आंख डालकर जवाब देने की हिम्मत रखता है। पिछले कुछ समय में कई बार ऐसा देखने को मिला जब कई मुद्दों को लेकर भारत ने अमेरिका को आईना दिखाते दिखाने का प्रयास किया। फिर चाहे वो मानवाधिकार पर उसके ज्ञान की बात हो या रूस से तेल खरीदने पर दो टूक जवाब देना। हाल ही में विदेश मंत्री एस जयशंकर आतंकवाद के मुद्दे को लेकर अमेरिका पर भड़क उठे थे। पाकिस्तान को अमेरिका की तरफ से मिले समर्थन पर जयशंकर ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि अमेरिका हमारी समस्याओं को बढ़ा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी भारत अपना पक्ष बेहद ही मजबूती के साथ रख रहा है। आज दुनिया भारत को एक वैश्विक शक्ति के रूप में देखने लगी हैं, जो दुनिया को राह दिखने की क्षमता रखता है। अगर ऐसे में अमेरिका, भारत के साथ दोहरा रवैया अपनाएगा तो यह उसके लिए खुद के पैरों पर कुल्हाड़ी मारने जैसा होगा।

यह खबर tfipost से ली गई है!

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